मेरठ कैंट स्थित बंगला नंबर 233 व 223 में MPS Girls Wing व MPS Main Wing का संचालन अवैध, कब होगी कार्यवाही!

  • [By: Meerut Desk || 2024-12-24 14:55 IST
मेरठ कैंट स्थित बंगला नंबर 233 व 223 में MPS Girls Wing व MPS Main Wing का संचालन अवैध, कब होगी कार्यवाही!

मेरठ। कैंट के वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला नंबर 233 व 223 में मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग व मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग का संचालन किया जा रहा है। इन दोनों अवैध स्कूलों का संचालन ताराचंद शास्त्री, उसके पुत्र विक्रमजीत शास्त्री एवं शास्त्री परिवार के अन्य लोगों के द्वारा किया जा रहा हैं। कैंट बोर्ड के इन दोनों बंगलों पर शास्त्री परिवार का अवैध कब्ज़ा है। दरअसल, सेंट्रल मार्केट प्रकरण में इस प्रकार के अवैध निर्माणों को सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी की रोशनी में देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह अपराधिक साजिश की श्रेणी में आते हैं। सेंट्रल मार्केट ध्वस्त करने के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख और सख़्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अपराध की श्रेणी में आता है और अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के साथ ही अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदारों पर भी मुक़दमा दर्ज़ होना चाहिए। केवल मुक़दमा दर्ज़ ही नहीं जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई भी अमल में लायी जानी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर बताया जाता है कि दोनों बंगलों को लेकर शास्त्री परिवार यानि एमपीएस के संचालकों के पास कोई मालिकाना हक नहीं है।

दरअसल कैंट के वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला नंबर 233 व 223 में मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग व मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग में कैंट एक्ट की धज्जियां उड़ाकर केवल अवैध निर्माण ही नहीं किए गए हैं, बल्कि शास्त्री परिवार इन दोनों ही बंगलों पर अवैध रूप से काबिज भी है। इसको लेकर जिस कानूनी बाधा की बात कही जा रही है, (अर्थात सेना, कैंट बोर्ड व डीईओ की संयुक्त कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट के स्टे) उसके हटते ही एमपीएस पर सेना का बुलडोजर चलना तय है। वहीं, दूसरी ओर आसपास के लोगों का कहना है कि मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग व मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग में जिस प्रकार से अवैध निर्माण किए गए हैं, उसके चलते अपराधिक साजिश को खारिज नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों पर मुक़दमा दर्ज़ कर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। 

बंगला नंबर 233 जीएलआर में सईदा बानो के नाम दर्ज़: रक्षा संपदा कार्यालय मेरठ के दस्तावेजों के अनुसार, वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला नंबर 233 (जिस पर मेरठ पब्लिक स्कूल अवैध रूप से संचालित है) तो आज भी जीएलआर में किन्हीं सईदा बानो के नाम दर्ज है। जब बंगला नंबर 233 जीएलआर में सईदा बानो के नाम पर है तो फिर उसमें मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग का निर्माण कैसे हो गया। इस खुलासे के बाद यह तो साफ हो गया है कि मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग पूरी तरह से अवैध है। कानून के जानकारों की माने तो डीईओ के स्तर से कोर्ट में केस को लिस्ट कराकर स्टे को खारिज कराया जाए तो एसएमपी पर बुलडोजर चलने का रास्ता तुरंत साफ हो जाएगा। एमपीएस पर यदि बुलडोजर चलेगा तो अवैध निर्माण करने वालों के लिए सेना की यह कार्रवाई एक सबक के रूप में याद रखी जाएगी। 

मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग: वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला 223 में संचालित किया जा रहा मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग भी पूरी तरह से अवैध है। इसमें समय-समय पर बड़े स्तर पर अवैध निर्माण किए गए। इन सभी अवैध निर्माणों को लेकर कैंट बोर्ड का इंजीनियरिंग सेक्शन नोटिस की कार्रवाई करता रहा है। कैंट प्रशासन के नोटिस को लेकर एमपीएस के संचालकों के स्तर से जीओसी इन चीफ के यहां रिट दायर की गई, लेकिन माना जा रहा है कि सेटिंग-गेटिंग के चलते संचालकों के स्तर से जीओसी के यहां दायर की गयी रिट को सुनवाई के लिए लिस्ट होने लगातार रोका जाता रहा। लेकिन अब एमपीएस के अवैध निर्माण अचानक फिर से सैन्य प्रशासन की नजर में आ गए हैं। ये अवैध निर्माण उच्च पदस्थत सैन्य अफसरों को खटकने लगे हैं। जिसके चलते कहा जा रहा है कि 2003 में लिया गया स्टे खत्म होते ही मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग व एमपीएस मेन पर सेना का बुलडोजर गरजता नजर आएगा। यह कभी भी हो सकता है।

मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग: वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला 233 जिसमें मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग संचालित किया जा रहा है। उसकी लीज खत्म करने की वजह इस बंगले में चेंज ऑफ़ परपज तथा अवैध निर्माण है। कैंट बोर्ड के एक्ट में यह गंभीर खामियों में दर्ज़ है। इस प्रकार के मामलों में कंपाउंडिंग की भी गुंजाइश खत्म हो जाती हैं। डीईओ के स्तर से सीधे नोटिस और सेना व पुलिस प्रशासन की मदद से अवैध निर्माण जमींदोज, जैसा कि पूर्व में भी कैंट प्रशासन अवैध रूप से बनाए गए बंगलों में करता रहा है। वेस्ट एंड रोड स्थित 223 व 233 एक आवासीय बंगला है, जिसे स्कूल में जिसको तब्दील कर उसका व्यवसायिक प्रयोग किया जा रहा है। कैंट एक्ट में यह कृत्य लीज खत्म करने के लिए पर्याप्त है और किया भी वैसा ही गया है।

रक्षा संपदा कार्यालय: मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड के अवर अभियंता ने हमारे संवाददाता को बताया कि आवंटित बंगलों के बाबत तमाम जानकारी मॉल रोड स्थित रक्षा संपदा कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। बंगले के मालिकाना और किरायेनामे संबंधी तमाम जानकारी वही से मिलेगी। बंगलों में अवैध कब्जेदार कब्जेदारों पर रक्षा संपदा कार्यालय ही कार्यवाही करता है। 

ग़ौरतलब है कि हरेंद्र सिंह ने रक्षा संपदा अधिकारी (डीईओ) मेरठ का कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता में अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा था कि बंगलों में म्युटेशन संबंधित जो भी मामले लंबित हैं, उसे प्राथमिकता से निपटाया जाएगा। जिससे जीएलआर और एचओआर सही किया जा सके। रक्षा भूमि पर अवैध कब्जे और अवैध निर्माण पर उन्होंने सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। जिन अवैध निर्माण की विधिक प्रक्रिया पूरी हो गई है। उन्होंने यह भी कहा था कि मेरठ के छावनी क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए बंगलों में रहने वाले लोगों की पहचान की जाएगी। इसके लिए जल्द ही सर्वे किया जाएगा। जिसमें आर्मी, रक्षा संपदा कार्यालय और कैंट बोर्ड की संयुक्त टीम गठित होगी। जो एक-एक बंगले में जाकर देखेगी कि बंगले में रहने वाले लोग कौन हैं। बंगलों में अवैध कब्जेदार बाहर भी किए जा सकते हैं।

आटीआई एक्टिविस्ट आदेश कुमार त्यागी का कहना है कि वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला नंबर 233 व 223 में मेरठ पब्लिक स्कूल गर्ल्स विंग व मेरठ पब्लिक स्कूल मेन विंग में कैंट एक्ट की धज्जियां उड़ाने और अवैध कब्ज़े से संबंध में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी जा रही है। कैंट बोर्ड को बंगला नंबर 233 व 223 के अवैध निर्माण और अवैध संचालन की उच्च स्तरीय जाँच करनी चाहिए। और इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की जाएगी। 

इस ख़बर से संबधित जानकारी प्राप्त करने के लिए जब एशियन एक्सप्रेस लाइव के संवाददाता ने मेरठ पब्लिक स्कूल ग्रुप के डायरेक्टर विक्रमजीत शास्त्री से बात करने के लिए फ़ोन किया तो विक्रमजीत शास्त्री ने न तो फ़ोन उठाया और न ही व्हाट्सप्प मैसेज का ज़वाब दिया। 

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