समझौतों के साथ नरेंद्र मोदी बनेंगे तीसरी बार प्रधानमंत्री 

  • [By: PK Verma || 2024-06-06 18:29 IST
समझौतों के साथ नरेंद्र मोदी बनेंगे तीसरी बार प्रधानमंत्री 

तीन बार मुख्यमंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहने के बाद शायद ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि नरेंद्र मोदी की मनमानी नहीं चलने वाली। वह अपनी मर्जी से संसद में कोई कागज पास नहीं करा सकेंगे। दस साल एक तानाशाह की तरह शासन करने वाले नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने बड़ा झटका दे दिया है। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के चक्कर में नरेंद्र मोदी अपने उसूलों आने मुद्दों और अपने विचारधारा से समझौता करने जा रहे है। नरेंद्र मोदी ने हिन्दू मुसलमान पर अपनी चुनावी रैलियां की। मुसलमानों को टारगेट किया जिसके चलते दुनिया भर में नरेंद्र मोदी की आलोचना हुई। लेकिन नरेंद्र मोदी को सिर्फ़ सत्ता से मतलब, सिर्फ कुर्सी से मतलब। विचारधारा गई डस्टबिन में। तीसरी बार अपनी सरकार बनाने के लिए नरेंद्र मोदी को जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार जिन्हे दुनिया पल्टूराम या पलटू कुमार के नाम से भी जानती है और दूसरे है तेलुगुदेशम पार्टी के चंद्रबाबू नायडू जिन्होंने अपने ससुर आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एंटी रामाराव की पार्टी में बगावत कराकर उनकी पार्टी पर कब्ज़ा कर लिया था। चंद्रबाबू नायडू ने एक बार नरेंद्र मोदी को आंतकवादी कहा था। नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बहुत कुछ कहा था। नितीश कुमार ने जब भाजपा को छोड़कर तेजस्वी यादव के साथ बिहार में सरकार बनाई थी तो भाजपा ने कहा था कि मर जायेंगे लेकिन कभी नीतीश कुमार के साथ नहीं आएंगे। लेकिन फिर साथ आ गए। दरअसल इन दोनों की नरेंद्र मोदी को सख़्त जरुरत है। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की। यानि अबकी बार चार सौ पार। सॉरी अबकी बार बैसाखी सरकार। अबकी बार कमजोर सरकार। अबकी बार मजबूर सरकार। 

लेकिन एक बात है। नरेंद्र मोदी जहां एंटी मुस्लिम विचारधारा के लिए जाने जाते है और अपनी पार्टी से किसी मुस्लिम को टिकट भी नहीं देते है। दूसरी और चंद्रबाबू नायडू और नितीश कुमार मुस्लिमों के भी पसंददीदा नेता है। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो है जिनमे ये दोनों नेता ईद के मौके पर मुस्लिम टोपी पहने नज़र आते है। लेकिन जब बात हो सत्ता पाने की। और जब बात हो विचारधारा की। तो नरेंद्र मोदी सिर्फ सत्ता चुनते है, विचारधारा नहीं। 

हलाकि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को इंडिया गठबंधन की और से भी दोनों को उप प्रधानमंत्री पद का खुला ऑफर है। लेकिन फ़िलहाल तो दोनों नरेंद्र मोदी के साथ उनके बराबर में बैठे है जहाँ पिछले दस सालों में किसी के भी बैठने की हिम्मत नहीं हुई। एक बात और दिन में कई कई बार कपड़े बदलने वाले नरेंद्र मोदी कल एक ही कपड़ों में नजर आये। यानी दूसरी पारी की आखरी कैबिनेट मीटिंग हो या राष्ट्रपति भवन जाकर संसद भंग करने की सिफारिश का पत्र और अपने मंत्रिमंडल और प्रधानमंत्री पद का इस्तीफ़ा देना हो। उसके बाद पेड़ की जड़ों में पानी देते हुए फोटो खिचवाना हो या फिर अपने गठबंधन के तमाम दलों के साथ समर्थन के लिए मीटिंग करना हो। सभी जगह एक ही ड्रेस। यह देखकर अच्छा लगा। 

नमस्कार, मै पीके वर्मा 

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