प्रगति यादव ने मुंह दिखाई में मिले रुपयों से ही दे दी पति की हत्या की सुपारी, प्रेमी के लिए 15वें दिन खुद का सुहाग उजाड़ा

  • [By: Meerut Desk || 2025-03-25 16:32 IST
प्रगति यादव ने मुंह दिखाई में मिले रुपयों से ही दे दी पति की हत्या की सुपारी, प्रेमी के लिए 15वें दिन खुद का सुहाग उजाड़ा

प्रगति यादव ने अपनी शादी के 15वें दिन ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की सुपारी देकर हत्या करा दी। 
दरअसल प्रगति अपने प्रेमी अनुराग से शादी करना चाहती थी। लेकिन घरवालों ने दबाव डालकर बहन के देवर दिलीप से उसकी शादी करा दी। शादी के बाद से ही प्रगति यादव ने पति की हत्‍या की साजिश रचनी शुरू कर दी थी। वह ससुराल में 5 दिन ही रही। इसके बाद मायके लौट गई। पति को कत्‍ल कर दिए जाने के बाद ही वह ससुराल वापस लौटी।

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्‍याकांड के बाद अब औरैया में भी वैसी एक घटना सामने आई है। जिसमे पत्नी ने शादी के 15 दिन के अंदर ही अपने प्रेमी से मिलकर अपने पति की हत्या करा दी। यहां प्रगति यादव जैसी एक दुल्‍हन बिल्‍कुल मुस्‍कान रस्तोगी जैसी निकली। शादी के 2 सप्ताह में ही उसने अपने पति को मौत के घाट उतरवा दिया। बताया जा रहा है कि प्रगति यादव ने दो लाख रुपए में पति दिलीप के नाम की सुपारी थी दी। एक लाख रुपए उसने शूटर को दे भी दिए थे। यह रकम प्रगति यादव ने अपनी मुंह दिखाई में मिले रुपयों से जुटाई थी। दरअसल प्रगति यादव अपनी शादी से खुश नहीं थी। अपने गांव के ही अनुराग उर्फ बबलू उर्फ मनोज यादव के साथ अवैध शारीरिक संबंध थे। पुलिस ने प्रगति यादव उसके प्रेमी अनुराग और सुपारी किलर रामजी नागर को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया था।

पुलिस जाँच से पता चला है कि प्रगति यादव अनुराग से शादी करना चाहती थी। लेकिन घरवालों ने दबाव डालकर दिलीप से उसकी शादी करा दी। शादी के बाद से ही प्रगति यादव ने अपने पति की हत्‍या की साजिश रचनी शुरू कर दी थी। ससुराल में वह 5 दिन ही रही। 5 दिन बाद ही वह मायके लौट गई। पति को कत्‍ल कर दिए जाने के बाद ही वह ससुराल वापस लौटी।

प्रगति यादव की शादी 19 मार्च को दिलीप से हुई थी। औरैया के सेहुद मंदिर के पास रहने वाले सुमेर सिंह के बेटे दिलीप (उम्र 21 वर्ष) की एसएस यादव क्रेन सर्विस के नाम से अपनी फर्म है। इस फर्म के जरिए कन्नौज के उमर्दा के पास शाह नगर में एक पुल के निर्माण का काम चल रहा है। दिलीप की हत्‍या के बाद पता चले घटनाक्रम के अनुसार 19 मार्च की सुबह वह हाइड्रा लेकर साइट पर गया था। दोपहर में करीब डेढ़ बजे के आसपास उसने अपने बड़े भाई संदीप को फोन कर घर आनेकी जानकारी दी थी। वापसी में वह पटना नहर सहार के पास एक होटल पर रुका था। यहीं पर बाइक से आए कुछ युवक बंबे में फंसी कार को हाइड्रा से निकालने की बात कहते हुए बाइक पर बिठाकर रास्ता दिखाने चले गए। होटल से करीब 7 किलोमीटर दूर पिपरोली गांव के पास दिलीप मरणासन्न हालत में ग्रामीणों को मिला।

ग्रामीणों से मिली सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दिलीप को अस्पताल में भर्ती कराया। अस्‍पताल में इलाज के दौरान 22 मार्च को दिलीप की मौत हो गई। दिलीप के घरवालों ने उसी समय हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस ने मामले में छानबीन की। सीसीटीवी कैमरों से मिली फुटेज ने दिलीप को बाइक पर बैठाकर ले जाने वालों की पहचान करा दी। पहचान होने के बाद अनुराग और रामजी को पकड़कर पूछताछ की गई तो सारा मामला खुल गया।

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