यूट्यूबर रणबीर इलहाबादिया को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार कहा, अभिव्यक्ति की आजादी कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं
- [By: Meerut Desk || 2025-02-19 15:41 IST
नई दिल्ली। अपने चैनल पर बकवास करने वाले यूट्यूबर रणबीर इलहाबादिया को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं। ग़ौरतलब है कि यूट्यूबर रणबीर इलहाबादिया ने अपने चैनल के कॉमेडी शो में अभिभावकों के संबंध में कई आपत्ति जनक टिप्पणी की थी जिसके चलते देश के कई राज्यों में रणबीर के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज़ किया गया था। रणबीर को फटकारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूट्यूबर रणबीर इलहाबादिया के दिमाग में गंदगी भरी पड़ी है।
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दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अभिभावकों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया को अश्लील भाषा इस्तेमाल करने के लिए मंगलवार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी बोलने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके दिमाग में गंदगी भरी है, जो उसने शो पर उगल दी। रणवीर की मानसिकता को विकृत और भाषा को निंदनीय करार देते हुए कोर्ट ने कहा कि उसकी भाषा बेटियों, बहनों, माता-पिता और यहां तक कि समाज को भी शर्मिंदगी महसूस कराती है।
हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच में सहयोग करने के निर्देश के साथ यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी। लेकिन साथ ही आदेश दिया कि रणवीर और उसके सहयोगी अगले आदेश तक कोई शो नहीं करेंगे। वह पासपोर्ट सरेंडर करेगा और सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बगैर देश छोड़कर नहीं जाएगा।
ये आदेश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रणवीर इलाहाबादिया की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज प्राथमिकियों को सुनवाई के लिए एक साथ संलग्न करने की मांग पर दिए। याचिका पर महाराष्ट्र और असम को नोटिस भी जारी किया। धमकी मिलने और जान को खतरा बताए जाने की दलील पर कोर्ट ने रणवीर को जांच में भाग लेने के लिए सुरक्षा के संबंध में महाराष्ट्र और असम की स्थानीय पुलिस से संपर्क करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया के खिलाफ गुवाहाटी, मुंबई और जयपुर में दर्ज प्राथमिकियों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, साथ ही कहा है कि इंडिया गॉट लैटेंट शो के आधार पर उसके खिलाफ कोई नयी प्राथमिकी नहीं दर्ज की जाएगी। आदेश दिया है कि वह जांच अधिकारी के बुलाने पर जांच में सहयोग करेगा। थाने में उसके साथ कोई वकील नहीं जाएगा। वह थाणे पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी को पासपोर्ट जमा कराएगा और कोर्ट की इजाजत के बगैर देश नही छोड़ेगा।
सोमवार को वकील डॉक्टर अभिनव चंद्रचूड़ ने कहा वह उसे सही नहीं ठहरा रहे, लेकिन उसके खिलाफ जो अश्लीलता फैलाने का मामला दर्ज हुआ है, वह नहीं बनता। कोर्ट का फिर सवाल था कि अगर इस भाषा को अश्लील और अभद्र नहीं कहा जाएगा तो किसे कहा जाएगा। अश्लीलता और अभ्रदता के क्या मानक हैं। अभिनव चंद्रचूड़ ने कहा कि इसे अश्लील नहीं, बल्कि लस्टफुल सेक्स थॉट कह सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी बरकरार रही, पूछा ऐसे व्यक्ति को क्यों राहत देनी चाहिए। चंद्रचूड़ ने अमीष देवगन, अर्नव गोस्वामी, आदि के फैसलों का हवाला देते हुए राहत मांगी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी महत्वपूर्ण: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट तब राहत देता है जब बहुत से मामले देश भर में दर्ज होते हैं, ताकि आरोपी अदालत में बचाव कर सके, लेकिन रणवीर के खिलाफ सिर्फ दो ही एफआईआर हैं, एक गुवाहाटी में और दूसरी महाराष्ट्र के ठाणे में, जो कि मुंबई का ही हिस्सा है और वहां वह रहता है। उसे दोनों जगह जाकर केस का सामना करना चाहिए।