मोदी सरकार में जूस पिलाकर अनशन नहीं तुड़वाया जाता

  • [By: PK VERMA || 2026-07-23 00:58 IST

आज शुरुआत यहां से करते है। जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट कर रहे नौजवानों पर ऐसे लाठीचार्ज किया जा रहा है कि ये देश के बच्चे नहीं आतंकवादी हो। निहत्थे बच्चों पर लाठीचार्ज। इस युवा को देखो लाठीचार्ज से इसे चेहरे से खून निकल रहा है। लेकिन यह डरा नहीं, झुका नहीं, टूटा नहीं। यह जोर जोर से कह रहा है कि मुझे मारो। मुझे मारो। मुझे और मारो। देश के लाखों करोड़ों युवाओ का जीवन बर्बाद होने पर अगर आवाज उठाई जाएगी तो उसकी सजा को मिलेगी।

यह अंग्रेजों की सरकार नहीं है जो महात्मा गांधी के अनशन करने पर आकर पूछे कि आपकी क्या मांगे है। यह कांग्रेस की सरकार नहीं जो ग्यारह दिन में खुद जंतर मंतर पर आकर उस अन्ना हजारे का अनशन तुड़वा दे जिसने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया। जिस अन्ना हजारे की आंदोलन को सीडी बनाकर भाजपा सत्ता।में आई और चिपक कर रह गई। यह नरेंद्र मोदी की सरकार है। यहां जूस पिलाकर अनशन नहीं तुड़वाया जाता। यहां जबरन अनशनकारी को घसीटकर हटाया जाता है और अगर उसके पक्ष में कोई युवा आवाज उठाता है तो उस पर लाठीचार्ज किया जाता है।

वैसे सोनम वांगचुक को जबरन और घसीटकर जंतर मंतर से हटा कर जो युवाओं की सुनामी सड़को पर उतरी है। उसकी मोदी सरकार ने कल्पना भी नहीं की थी। 

आपको किसानों का आंदोलन याद है। उस आंदोलन को कुचलने के लिए ओर दबाने के लिए सड़कों पर कीलें ठोक दी गई थी। उस आंदोलन के दौरान कई सौ किसानों की  मौत हो गई थी। आखिर नरेंद्र।मोदी को।नेशनल टीवी पर आकर कहना पड़ा था कि कृषि के तीनों काले कानूनों को हम वापिस लेते है। हमारी तपस्या।में कुछ कमी रह गई थी।

अब ऐसे ही स्थिति पैदा हो गई है। पेपर लीक के लिए शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पीएम मोदी इस्तीफा दो। नरेंद्र मोदी इस्तीफ़ा दो। अब यह जलूस एक सैलाब बन चुका है। यहां इक्ट्ठे हुए युवा पूरे देश के दूर दूर के इलाकों से आए है। इस उम्मीद के साथ कि उनकी बाद सुनी जाएगी। समझी जाएगी। लेकिन युवा शायद भूल गए थे यह मोदी सरकार है। जहां अपने भ्रष्ट नेताओं और मंत्रियों को बचाने के लिए युवाओं का आंदोलन कुचलने के लिए लाठी चार्ज तक करवा दिया गया।

एक बात और हजारों युवाओं के इस आंदोलन में शायद ही कोई अब्दुल या शबनम हो। यह ज्यादातर मोदी की रैली में मोदी मोदी चिल्लाने वाले युवा है, जो चुनावी रैली से वोट बदलकर मोदी को तीन बार सत्ता सौंप चुकी है। तो क्या यह मान लिया जाए कि अब बीजेपी को इन वोटरों की जरूरत नहीं है। जब तक चुनाव आयोग उनके साथ है उन्हें किसी आंदोलन और अनशन ने डरने की जरूरत नहीं। खैर बात चाहे जो भी हो। शिक्षा में सुधार की मांग कर रहे निहत्थे बच्चों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए़।

इस माहौल में मुझे अमर शहीद खुदीराम बोस की ये लाइने याद आ रही है।
लड़ नहीं सकते तो बोलो।
बोल नहीं सकते तो लिखो।
लिख भी नहीं सकते तो साथ दो।

जय हिंद

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