गृह मंत्री की पहल से 32 साल पुराना जल विवाद समाप्त, छह राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता

  • [By: PK VERMA || 2026-09-17 01:09 IST
गृह मंत्री की पहल से 32 साल पुराना जल विवाद समाप्त, छह राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता

नई दिल्ली: सहकारी संघवाद और ‘टीम इंडिया’ की भावना का एक अनूठा उदाहरण पेश करते हुए, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में उत्तर भारत के छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बहुप्रतीक्षित किशाऊ बहुउद्धेशीय परियोजना के ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

नई दिल्ली में संपन्न इस उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया। दशकों से कागजों पर अटकी इस महत्वकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से उत्तर भारत के इन छह राज्यों के बीच जल सहयोग का एक नया युग शुरू हुआ है।

मोदी सरकार में सुलझा 10वां बड़ा जल विवाद

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में राज्यों के बीच आपसी संवाद और समन्वय के बल पर एक के बाद एक जटिल जल विवादों का समाधान हुआ है। किशाऊ परियोजना पर बनी यह सहमति इस शृंखला का 10वां बड़ा जल विवाद समाधान है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से 2026 के बीच देश में दशकों से लंबित कई बड़े जल संकटों और परियोजनाओं के गतिरोध को सफलतापूर्वक समाप्त किया गया है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं और वित्तीय मॉडल

  • राष्ट्रीय परियोजना व वित्तीय भार: लगभग 15,624 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को 'राष्ट्रीय परियोजना' का दर्जा प्राप्त है। इसके तहत 90 प्रतिशत वित्तीय खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी।

  • विशाल बांध का निर्माण: यह परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर यमुना की सबसे लंबी सहायक टोंस नदी पर बनाई जाएगी, जहां 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध प्रस्तावित है।

  • सिंचाई और बिजली उत्पादन: इस परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी, जिससे लगभग 97,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई होगी और 422 मेगावाट (लगभग 1,476 मिलियन यूनिट) स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन किया जा सकेगा।

छह राज्यों को मिलने वाले लाभ

  • दिल्ली और यमुना का संरक्षण: गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि इस समझौते से सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को मिलेगा। परियोजना के पानी का एक बड़ा हिस्सा यमुना नदी के पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) को सुधारने में उपयोग होगा, जिससे राजधानी में पानी की किल्लत दूर होगी और यमुना नदी के पुनर्जीवन व सफाई अभियानों को अभूतपूर्व गति मिलेगी।

  • उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य: इस परियोजना से उत्तर प्रदेश (विशेषकर पश्चिमी यूपी के जिलों), हरियाणा और राजस्थान को सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को बिजली संकट से मुक्ति मिलने के साथ-साथ उनके आर्थिक हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

एशियन एक्सप्रेस लाइव विशेष: दशकों पुराने जल गतिरोध का अंत यह साबित करता है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति और सहकारी संघवाद के तहत संवाद बढ़ता है, तो बड़े से बड़े क्षेत्रीय विकास के अवरोध स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

इस ऐतिहासिक समझौते से उत्तर भारत के जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में किस प्रकार के सकारात्मक बदलाव की उम्मीद रखते हैं?

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