क्या यूपी 2027 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ नहीं होंगे मुख्यमंत्री चेहरा 

  • [By: PK VERMA || 2026-07-23 00:50 IST
क्या यूपी 2027 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ नहीं होंगे मुख्यमंत्री चेहरा 

अभी सप्ताह भर पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ होम मिनिस्टर अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे। इस मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। यह तस्वीर अपने आप में बहुत बड़ी कहानी बयान कर रही है। इस तस्वीर को देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि किस मुद्दे पर मुलाकात हो रही है। होम मिनिस्टर अमित शाह का बैठने का अंदाज और चेहरे पर एटीट्यूड और चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ के चेहरे से दिख रही बेबसी और लाचारी।

तस्वीर साफ साफ कह रही है कि उत्तर प्रदेश में में योगी आदित्यनाथ नहीं चलेंगे। मतलब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा। और यह काम अब कभी भी हो सकता है। पता चले कि आप सुबह सोकर उठे और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने की खबर अखबार के पहले पन्ने पर मिले।
आज योगी आदित्यनाथ ने एक निजी चैनल के कार्यक्रम जिस तरह से यूपी में अपनी उपलब्धियां गिनाई इससे सियासी गलियारों चर्चा तेज हो गई है और कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ की यह स्पीच किसी फेयरवेल पार्टी या रिटायरमेंट पार्टी के समय दी जाने वाली स्पीच की तरह है।

यानी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं रहेंगे।

जब उसी निजी चैनल के कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष से पूछा गया कि क्या योगी आदित्यनाथ आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे, तो प्रदेश अध्यक्ष ने हां में जवाब देने के बजाय पार्टी की परम्परा और सिस्टम में बारे में बोलना शुरू कर दिया। यानी योगी आदित्यनाथ अगले चुनाव में मुख्यमंत्री फेस नहीं होंगे।

अभी हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लखनऊ आए। उनके स्वागत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य फूलों का बुके लेकर खड़े थे। इस वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ की तरफ देखे बिना उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को मुस्कुराते हुए देखा और उनसे बुके लेकर गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया। यह वीडियो भी खुद में बड़ा संदेश दे रही है।

एक और कुछ लोगों का कहना है कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से देश की जनता का ध्यान सिर्फ जंतर मंतर तक ही सिमट कर रह गया है। देश की जनता एथेनॉल, बारिश में कई सौ करोड़ की लागत से बनी सड़कों में गड्ढे, ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री मोदी की ट्रेलिंग। उत्तर प्रदेश की सियासत में उथल पुथल। सभी का ध्यान इस समय जंतर मंतर तक ही सीमित होकर रहा गया है।

फिलहाल संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका है। होम मिनिस्टर अमित शाह वंदे मातरम पर एक बिल लाये है। जिसके अनुसार वंदे मातरम् को गाने से रोकने, उसमें बाघा उत्पन्न करने जैसी घटनाओं पर आरोपी को तीन साल की जेल या जुर्माना होगा। या जेल ओर जुर्माना दोनों हो सकते है।

फिलहाल देश की जनता का पूरा ध्यान जंतर मंतर पर चल रहे युवाओं के अनशन और संसद की और पैदल मार्च पर ही है जहां निहत्थे युवाओं को लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। राममंदिर चंदा चोरी का मुद्दा पीछे रह गया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति का मुद्दा फिलहाल पीछे रह गया है।

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