भारत में ब्रिक्स का सम्मलेन भारतीय के लिए गर्व की बात 

  • [By: PK VERMA || 2026-09-11 14:43 IST
भारत में ब्रिक्स का सम्मलेन भारतीय के लिए गर्व की बात 

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन भारत की अध्यक्षता (BRICS Chairship) के अंतर्गत हो रहा है।

आइये इस उच्च स्तरीय आयोजन से जुड़े सभी प्रमुख पहलू, उद्देश्य, और भारत के नेतृत्व की भूमिका जानते है। 
यह मुख्य शिखर सम्मेलन 2 दिनों यानी 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित हो रहा है। हालांकि, भारत की अध्यक्षता में साल भर के दौरान देश के 25 से अधिक शहरों में लगभग 350 बैठकें और उच्च स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य:
भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष के ब्रिक्स सम्मेलन का मुख्य विषय “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) है।

इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं: वैश्विक शासन में सुधार: संयुक्त राष्ट्र (UN), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की मांग करना ताकि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।स्थानीय मुद्राओं में व्यापार: पश्चिमी देशों के प्रभुत्व और प्रतिबंधों के असर को कम करने के लिए आपसी व्यापार में सदस्य देशों की राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) के उपयोग और क्रॉस-बेहद भुगतान प्रणालियों को बढ़ावा देना। आर्थिक व तकनीकी सहयोग: आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को मजबूत करना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल व्यापार, और छोटे व्यवसायों (MSMEs) के लिए वित्तीय पहुंच को आसान बनाना। खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा: वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए साझा उपाय खोजना।

ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख देशों के नेता नेताओ के बारे में भी जानते है। 
यह सम्मेलन विस्तारित ब्रिक्स प्रारूप में हो रहा है, जिसमें पूर्ण सदस्य देशों, साझीदार देशों और आंमत्रित मेहमानों के नेता हिस्सा ले रहे हैं:

रूस: राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
चीन: राष्ट्रपति शी जिनपिंग
दक्षिण अफ़्रीका: राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा
ईरान: राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन

इसके अलावा अन्य सदस्य देश: ब्राजील (प्रतिनिधिमंडल), मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया के शीर्ष नेता/प्रतिनिधि। विशेष आमंत्रित: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई अन्य देशों के नेता और वैश्विक संस्थाओं के प्रमुख।

इस शिखर सम्मलेन के मेजबान भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय भूमिका है। 

वैश्विक सेतु की भूमिका (Bridge-builder): वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावों (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व के संकट) के बीच पीएम मोदी की कूटनीति पर पूरी दुनिया की नजर है। भारत 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज बनकर उभरा है।

द्विपक्षीय कूटनीति: इस सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (सात साल बाद भारत आए हैं) के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में ऐतिहासिक रूप से अहम हैं। मानवता-केंद्रित दृष्टिकोण: पीएम मोदी के "Humanity First" (मानवता सर्वोपरि) के दृष्टिकोण को इस सम्मेलन के एजेंडे में सर्वोपरि रखा गया है।

गृह मंत्री अमित शाह और आंतरिक सुरक्षा/प्रशासनिक प्रबंधन:
सुरक्षा व्यवस्था और संप्रभुता: दुनिया के इतने बड़े और प्रभावशाली राष्ट्राध्यक्षों (विशेषकर रूस और चीन के सर्वोच्च नेताओं) के एक साथ नई दिल्ली में मौजूद होने के कारण आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के समन्वय से राष्ट्रीय राजधानी में अभूतपूर्व और चाक-चौबंद सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है। एयरपोर्ट से लेकर 'भारत Mandapam' और वीआईपी होटलों तक त्रि-स्तरीय सुरक्षा, ट्रैफिक डायवर्जन और खुफिया एजेंसियों की चौकसी सीधे गृह मंत्रालय की निगरानी में संचालित हो रही है।

एक सुव्यवस्थित, शांतिपूर्ण और सुरक्षित मेजबानी सुनिश्चित करके गृह मंत्रालय ने यह साबित कर दिया है कि भारत वैश्विक स्तर के मेगा इवेंट्स को शीर्ष स्तर की सुरक्षा देने में पूरी तरह सक्षम है।

आयोजन का समग्र महत्व: ब्रिक्स के स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर नई दिल्ली में हो रहा यह 18वां शिखर सम्मेलन इस बात का प्रतीक है कि भारत वैश्विक कूटनीति में 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) का पालन करते हुए पश्चिमी देशों और पूर्वी शक्तियों—दोनों के साथ संतुलित संबंध रखते हुए विश्व शांति और बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World) का नेतृत्व कर रहा है।

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