राष्ट्र निर्माण में योगदान ही हर स्वयंसेवक का ध्येय: मोहन भागवत

  • [By: Asian Express Live || 2026-10-25 20:22 IST
राष्ट्र निर्माण में योगदान ही हर स्वयंसेवक का ध्येय: मोहन भागवत

राष्ट्र निर्माण में योगदान ही हर स्वयंसेवक का मुख्य ध्येय: डॉ. मोहन भागवत

बिलासपुर / नई दिल्ली (एशियन एक्सप्रेस लाइव)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि संघ और स्वयंसेवक एक-दूसरे के पूरक हैं, ठीक वैसे ही जैसे आक्सीजन और हाइड्रोजन मिलकर पानी का निर्माण करते हैं। बिलासपुर प्रवास के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित बैठकों और बौद्धिक वर्ग को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयंसेवकों का असली उद्देश्य समाज से कुछ लेना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना सर्वस्व योगदान देना है।

डॉ. हेडगेवार के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान

संघ प्रमुख ने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का स्मरण करते हुए उन्हें एक ऐसा 'बीज' बताया, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देशसेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हर स्वयंसेवक संस्थापक के आदर्शों को अपने जीवन में उतारे और राष्ट्र निर्माण के कार्य को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए।

विघटनकारी ताकतों के खिलाफ डटकर काम कर रहा संघ

अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में समरसता स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। साथ ही, देश को तोड़ने या समाज में वैमनस्य फैलाने वाले विघटनकारी प्रयासों के खिलाफ संघ पूरी दृढ़ता के साथ सक्रिय है।

छत्तीसगढ़ में सांगठनिक ढांचे के विकेंद्रीकरण पर मंथन

बिलासपुर प्रवास के पहले दिन गुरुवार को शुरू हुई बैठकों का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। इस दौरान छत्तीसगढ़ में संघ के सांगठनिक ढांचे के विकेंद्रीकरण और राज्य को दो संभाग इकाइयों में विभाजित करने की संभावनाओं पर गहन चर्चा की गई।

 * प्रस्तावित नई संरचना: यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो दोनों संभागों में प्रांत की कार्यकारिणी की तर्ज पर ही सांगठनिक ढांचा तैयार किया जाएगा।

 * कार्यकारिणी का स्वरूप: प्रत्येक संभाग में करीब 22 पदाधिकारियों की कार्यकारिणी बनाने की योजना है, जिसमें संभाग संघचालक, कार्यवाह और बौद्धिक प्रमुख समेत अन्य दायित्ववान कार्यकर्ता शामिल होंगे।

बैठकों में इन प्रमुख बिंदुओं पर रही रूपरेखा:

 * कार्ययोजना प्रस्तुतियाँ: रायपुर और बिलासपुर सहित विभिन्न संभागों के चुनिंदा प्रांतीय प्रचारकों, विभाग टोली के पदाधिकारियों और आनुषंगिक संगठनों (विभिन्न प्रकल्पों) के प्रमुखों ने अपनी आगामी कार्य-योजनाएं प्रस्तुत कीं।

 * वनंचलों में संपर्क विस्तार: आगामी अभियानों के तहत दूर-दराज के वनांचल क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने और वैचारिक प्रसार को गति देने की कार्ययोजना तय की गई।

इन बैठकों में तय किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर आने वाले समय में संघ की कार्यप्रणाली और वैचारिक विस्तार को और अधिक मजबूती मिलने की पूरी संभावना है।

(यह रिपोर्ट एशियन एक्सप्रेस लाइव के विशेष संस्करण हेतु संकलित की गई है।)

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