संघ का बदलेगा स्वरूप: पश्चिमी यूपी व उत्तराखंड को मिलाकर बनेगा एक नया 'क्षेत्र'

  • [By: Asian Express Live || 2026-10-25 13:43 IST
संघ का बदलेगा स्वरूप: पश्चिमी यूपी व उत्तराखंड को मिलाकर बनेगा एक नया

संघ का बदलेगा स्वरूप: पश्चिमी यूपी व उत्तराखंड को मिलाकर बनेगा एक नया 'क्षेत्र'

आगरा / मेरठ (एशियन एक्सप्रेस लाइव) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने संगठन और शाखा तंत्र को और अधिक मजबूत तथा प्रभावी बनाने के लिए व्यापक संगठनात्मक बदलाव करने जा रहा है। योजना के तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर एक नया संगठनात्मक 'क्षेत्र' बनाया जाएगा। इसके साथ ही, पारंपरिक 'प्रांत' व्यवस्था की जगह अब 'संभाग' व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि शाखाओं का विस्तार सीधे गांव और बस्ती स्तर तक किया जा सके।

15 नवंबर को बरेली बैठक में होगी औपचारिक घोषणा

संघ की इस नई संगठनात्मक संरचना और संभाग टीम की आधिकारिक घोषणा 15 नवंबर को बरेली में आयोजित होने वाली संघ की महत्वपूर्ण बैठक में की जा सकती है। प्रांत स्तर के कुछ पदाधिकारियों को संभाग व्यवस्था में समायोजित करने की तैयारी है।

जानिए कैसी होगी नई 'संभाग' संरचना:

प्रांत व्यवस्था समाप्त होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में नए संभागों का गठन इस प्रकार किया जाएगा:

 * आगरा संभाग: इसमें आगरा और अलीगढ़ मंडल शामिल होंगे।

 * बरेली संभाग: इसमें बरेली और मुरादाबाद मंडल को शामिल किया गया है।

 * मेरठ संभाग: इसमें सहारनपुर और मेरठ मंडल शामिल रहेंगे।

 * उत्तराखंड: कुमाऊं और गढ़वाल के अलग-अलग संभाग बनाए जाएंगे।

इन सभी संभागों को मिलाकर उत्तर क्षेत्र व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा।

चुनावों का पूरा शेड्यूल:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रत्येक तीन वर्ष में सर कार्यवाह (महासचिव) का चुनाव होता है। विजयादशमी के बाद चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है:

 * संभाग व क्षेत्र चुनाव: नवंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर जनवरी तक पूरे कर लिए जाएंगे।

 * सर कार्यवाह चुनाव: मार्च माह में आयोजित होंगे।

Gen-Z और गांव-बस्ती तक शाखाएं पहुंचाने पर फोकस

संघ इस बड़े बदलाव के माध्यम से शाखाओं की संख्या में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। अभी तक न्याय पंचायत स्तर तक संचालित होने वाली शाखाओं को अब प्रत्येक गांव और शहर की बस्ती तक गहराई से पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा, नई पीढ़ी (Gen-Z) और युवाओं को संगठन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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