यूपी में अगले सप्ताह अमित शाह और नितिन नबीन चुनावी रणनीति को देंगे धार

  • [By: PK VERMA || 2026-10-26 11:55 IST
यूपी में अगले सप्ताह अमित शाह और नितिन नबीन चुनावी रणनीति को देंगे धार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन भाजपा ने अभी से जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की जोड़ी अगले एक सप्ताह के भीतर चुनावी तस्वीर साफ कर देगी।

पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े पहले से ही प्रदेश में लगातार दौरे कर संगठन और सरकार के बीच समन्वय बैठकें कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ मिलकर भाजपा अलग-अलग क्षेत्रों में तालमेल बैठा रही है।

*क्या है पूरा कार्यक्रम?*

*1. रविवार को वाराणसी में मोदी का सॉफ्ट पिच:* प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक कपड़ा मिल का शिलान्यास किया और गंगा किनारे आम कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर एयर शो देखा। कोई बड़ी जनसभा नहीं, लेकिन चुनावी पारा चढ़ाने का साफ संदेश।

*2. 27 अक्टूबर को आजमगढ़ में नवीन की गरज:* सपा के अभेद्य दुर्ग माने जाने वाले आजमगढ़ में 27 को नितिन नवीन हुंकार भरेंगे। 2017 की प्रचंड लहर में भी आजमगढ़ की 10 में से सिर्फ 1 सीट भाजपा जीत पाई थी, जबकि 2022 में खाता भी नहीं खुला। इसलिए पूर्वांचल की प्रयोगशाला बनी वाराणसी और आजमगढ़ दोनों ही अहम हैं।

*3. 30-31 अक्टूबर को लखनऊ में शाह का मंथन:* गृह मंत्री अमित शाह लखनऊ में दो दिन रहेंगे। प्रदेश और राष्ट्रीय पदाधिकारियों, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों, क्षेत्रीय और जिला इकाइयों और सभी 6 मोर्चों के साथ बंद कमरे में 'यूपी मंथन' करेंगे। 2014 और 2017 वाली माइक्रो मैनेजमेंट की पटकथा फिर लिखी जाएगी।

*मनोवैज्ञानिक दांव भी:*

नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एनडीए के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के मंच पर साथ आकर सपा को उसके घर में घेरने की रणनीति पर काम करेंगे। राजभर का मंच इसलिए भी अहम है क्योंकि एनडीए के दूसरे घटक निषाद पार्टी ने हाल ही में बगावती तेवर दिखाते हुए गठबंधन छोड़ने तक की बात कही है।

*भाजपा की असली चिंता क्या?*

पार्टी के अंदर तीन स्तर पर मंथन है:

- संगठन, सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच अंतर्विरोध और विधायकों के प्रति नाराजगी।

- यूसीसी, आरक्षण और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों पर युवाओं में गुस्सा।

- 2024 लोकसभा में सपा के PDA फॉर्मूले के हिट होने के बाद ओबीसी वोटों को सहेजने का दबाव। इसी वजह से सुभासपा, रालोद, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के साथ रिश्ते सहेजने की कवायद तेज है।

चर्चा है कि टिकट बदलने की कवायद के बीच विधायकों के विरोधी सुरों से निपटने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए शाह सभी छह क्षेत्रों का दौरा कर सिर्फ रणनीतिक धार ही नहीं, बल्कि जमीनी हौसला भी देंगे।

कुल मिलाकर नवंबर से भाजपा पूरी ताकत से जमीन पर उतरने जा रही है।

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