भाजपा विधायक धर्मेंद्र भारद्वाज पर एससी-एसटी छात्रों की 29 करोड़ की छात्रवृति डकारने का आरोप में ईडी की बड़ी कार्यवाही, करोडो की संपत्ति जब्त  

  • [By: PK VERMA || 2026-06-17 00:34 IST
भाजपा विधायक धर्मेंद्र भारद्वाज पर एससी-एसटी छात्रों की 29 करोड़ की छात्रवृति डकारने का आरोप में ईडी की बड़ी कार्यवाही, करोडो की संपत्ति जब्त  

मेरठ। आज सुबह प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने मेरठ से भाजपा विधान परिषद् सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज के उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड स्थित कई शैक्षिणक संस्थानों पर छापेमारी की। भाजपा नेता पर लगभग 29 करोड़ रूपये की छात्रवृति के गबन का आरोप है। इस गबन के बाबत उत्तराखंड पुलिस द्वारा मुकदमा भी दर्ज़ किया गया था। ईडी ने भाजपा नेता धर्मेंद्र भारद्वाज की उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड स्थित 3 शैक्षिक संस्थानों की संपत्ति जब्त कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय ने भाजपा नेता लगभग 14 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की है। 29 करोड़ का यह घोटाला सन 2011 से 2017 के बीच करोड़ों रुपए का स्कॉलरशिप घोटाला किया गया था। भाजपा नेता धर्मेंद्र भारद्वाज ने कहा कि इन शिक्षण संस्थानों की प्रबंधन कमेटी से मेरा नाता नहीं। यह तो जाँच का विषय है। कागज कभी नहीं मरते। 

भाजपा नेता धर्मेंद्र भारद्वाज ने अपने संस्थानों/कॉलेजों में फर्जी छात्र दिखाकर स्कॉलरशिप के 29 करोड़ रुपये डकार लिये थे। और स्कालरशिप की 29 करोड़ की सरकारी धन से धर्मेंद्र भारद्वाज ने जमीने खरीदी, कॉलेज, यूनिवर्सिटी खड़े कर लिये। 

प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार (15 जून 2026) को ये जानकारी दी. ईडी 2020 से धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इस मामले की जांच कर रही है। ईडी ने उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज उस प्राथमिकी का संज्ञान लिया, जो 2011-12 से 2016-17 के दौरान अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के लिए मैट्रिक के बाद दी जाने वाली छात्रवृत्ति को धोखाधड़ी से हासिल करने और उसका दुरुपयोग करने से संबंधित थी। ईडी ने एक बयान में कहा कि जांच के तहत उसने हरिद्वार और रुड़की में 13.83 करोड़ रुपये की संपत्ति जैसे सावधि जमा, जमीन और शैक्षणिक/संस्थागत इमारतें कुर्क करने का छठा आदेश जारी किया था। जांच में पाया गया कि छात्रवृत्ति के 6,208 दावों में से 2,895 (46.63 प्रतिशत) फर्जी थे। एजेंसी ने कहा कि इस धोखाधड़ी के कारण राज्य सरकार को नुकसान हुआ। आरोपी व्यक्तियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को गैर-कानूनी फायदा हुआ। 

29 करोड़ के सरकारी धन के गबन के आरोपी धर्मेंद्र भारद्वाज के ख़िलाफ़ ईडी ने इस मामले में मनी-लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। यह घोटाला धर्मेंद्र भारद्वाज के मेरठ स्थित महावीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में घोटाला हुआ था। आज इस संसथान को महावीर यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा उत्तराखंड के रुड़की का रिम्स, मदरहुड इंस्टीट्यूट भी करोड़ो के इस घोटाले में शामिल है। घोटाले का राजफाश होने के बाद और मुकदमा लिखे जाने के बाद धर्मेंद्र भारद्वाज के संस्थाओं से जुड़ी मनिका शर्मा नामक युवती को जेल हुई थी। 

दरअसल उत्तराखंड के चर्चित अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने यह बड़ी कार्रवाई भाजपा नेता धर्मेंद्र भारद्वाज के ख़िलाफ़ की है। ईडी ने करीब धर्मेंद्र भारद्वाज की लगभग 13.83 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह मामला साल 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए दी जाने वाली पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। इस मामले जांच की शुरुआत उत्तराखंड पुलिस की एफआईआर के आधार पर की गई थी। 

ग़ौरतलब है कि ईडी की जांच में छात्रवृति के 2,895 दावे फर्जी पाए गए। ईडी की जांच में पता चला कि कुछ निजी कॉलेजों, सोसायटियों और ट्रस्टों ने फर्जी और अयोग्य छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति का पैसा हासिल किया। जांच में सामने आया कि 6,208 छात्रवृत्ति दावों के जरिए करीब 27.98 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। जांच के दौरान 2,895 दावे फर्जी पाए गए। इनमें ऐसे छात्र शामिल थे जो कॉलेज में मौजूद ही नहीं थे, या परीक्षा में फेल हो चुके थे, विश्वविद्यालय में पंजीकृत नहीं थे या जिनके नाम दोबारा इस्तेमाल किए गए थे। धर्मेंद्र भरद्वाज के कॉलेजों में फर्जी छात्रों के नाम पर 29 करोड़ रूपये की सरकारी धनराशि को डकार लिया। 

ईडी के अनुसार लगभग 3 हजार छात्र-छात्राओं के नाम पर बैंक में फर्जी खाते खोले गए और उनका संचालन कॉलेज प्रबंधन के लोग कर रहे थे। छात्रवृत्ति का पैसा खातों में आने के बाद उसे संस्थानों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि इस पैसे को कई खातों में घुमाकर उसके असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई। बाद में इसी रकम से जमीन, भवन और अन्य संपत्तियां खरीदी गईं। ईडी ने मामले में मनीका शर्मा की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। एजेंसी का कहना है कि छात्रवृत्ति राशि के इस्तेमाल और कथित हेराफेरी में उनकी सक्रिय भूमिका सामने आई है। 

आज की कार्यवाही में ईडी ने फिक्स्ड डिपॉजिट, जमीन के टुकड़े और हरिद्वार और रुड़की में स्थित शैक्षणिक भवनों समेत करीब 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। खबर लिखे जाने तक ईडी की जाँच जारी है। 

ग़ौरतलब है कि भाजपा एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज चौधरी चरणसिंह विवि कार्य परिषद् समिति के भी सदस्य हैं। चर्चा है कि संघ के एक बड़े अधिकारी का धर्मेंद्र भारद्वाज को बड़ी सपोर्ट है। इन दिनों धर्मेंद्र भारद्वाज मेरठ शहर में 2027 में होने वाले विधानसभा के लिए गली-गली प्रचार कर रहे है। इतने विश्वास के साथ कोई नेता तभी प्रचार कर सकता है जब उसे पीछे से संघ या पार्टी की पूरी सपोर्ट हो। जबकि अभी तक 2027 के बारे में कोई सुचना, नोटिफिकेशन या पार्टी की और उम्मीदवार घोषित किये गए है। वास्तव में यह अति आत्मविश्वास का मामला है। 

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