सीसीएस यूनिवर्सिटी के इंजीनयर मनीष मिश्रा ने तोड़े भ्रष्टाचार के तमाम रिकॉर्ड 

  • [By: Meerut Desk || 2025-11-16 01:09 IST
सीसीएस यूनिवर्सिटी के इंजीनयर मनीष मिश्रा ने तोड़े भ्रष्टाचार के तमाम रिकॉर्ड 

मेरठ। जब से मनीष मिश्रा ने विवि के सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर चार्ज लिया है तभी से भ्रष्टाचार की नई-नई इबारतें लिखी जा रही है। कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार में नए-नए कीर्तिमान स्थापित किये जा रहे है। ऐसा लगता है कि जैसे भ्रष्टाचार की पिच पर प्रतियोगिता हो रही है कि सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी कौन? सबसे बड़ा कमीशनखोर, रिश्वतखोर कौन? सरकारी ख़जाने पर सबसे बड़ा डाका डालने वाला कौन? विवि में 10 रूपये की वस्तु 100 रूपये में खरीदी जा रही है। साफ सुथरी, मजबूत और खूबसूरत भवनों में तोड़फोड़ कर उन्हें नए रूप में संवारा जा रहा है। डेकोरेट किया जा रहा है। इस तरह के कई निर्माण कार्यों में तो बिना अनुमति और बिना जरुरत के ही तोड़कर दोबारा बनाया जा रहा है ताकि कई गुना अधिक दरों पर दोबारा निर्माण कार्य एवं इंटीरियर कराकर लाखों-करोडो रूपये की भारी भरकम रकम कमीशन में ली जा सके। इतना ही नहीं मनीष मिश्रा की विवि के सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर नियुक्ति को भी फर्जी बताया जा रहा है जिसकी दर्जनों शिकायतें राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय से की गई है। 

मिली हुई है छूट, आओ मिलकर मचाये लूट: विवि परिसर के इंजीनियरिंग सेक्शन (सिविल) के प्रभारी सहायक अभियंता मनीष मिश्रा ने तो लूट खसोट और कमीशन खोरी में विवि की स्थापना से आजतक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए है। गौरतलब है कि सहायक अभियंता (सिविल) मनीष मिश्रा की नियुक्ति भी फर्जी तरीके से उत्तर प्रदेश शासन के नियमों को कूड़े की टोकरी में डालकर की गई है। इस फर्जी नियुक्ति और इस विभाग के प्रभारी की दर्जनों ही नहीं शायद सैकड़ों शिकायतें राजभवन, उत्तर प्रदेश सरकार एवं विवि की कुलपति से भी की गई है। लेकिन सभी शिकायतों को अलमारी में बंद कर दिया जाता है। ऐसा लगता है कि जैसे कुर्सी मिल जाने पर लूट मचाने की छूट मिल गई हो। यानि मिली हुई है छूट, आओ मिलकर मचाये लूट। 

विवि में 300 करोड़ रूपये का भ्रष्टाचार: ग़ौरतलब है कि कुछ महीने पहले चौधरी चरण सिंह विवि की कुलपति संगीता शुक्ला, वित्त अधिकारी रमेश चन्द्र निरंजन, सेंट्रल लाइब्रेरी प्रभारी जमाल अहमद सिद्द्की, सहायक अभियंता मनीष मिश्रा और कंप्यूटर इंचार्ज संदीप के फोटो लगे इश्तेहार विवि परिसर और शहर भर में चस्पा किये गए थे जिसमे उपरोक्त अधिकारियों पर 300 करोड़ रूपये का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया गया था। 300 करोड़ रूपये के इस महाभ्रष्टाचार की खबर मेरठ के ही नहीं बल्कि देश के मैनस्ट्रीम मीडिया ने कवर किया था। लगभग तमाम जगह शिकायतें होने के बाद भी सभी भ्रष्टाचारी बेख़ौफ़, बिना डरे और बिना रुके लगातार भ्रष्टाचार करने में लगे हुए है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने की वजह कुछ राजनीतिक आकाओं की कृपादृष्टि होना भी बताया जा रहा है। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि कानून से बड़ा कुछ भी नहीं। जिस दिन कानून अपना काम करेगा उस दिन कोई राजनीतिक आका बचाने नहीं आएगा। 

विवि अभियंता मनीष मिश्रा के कई सौ करोड़ रूपये के महाभ्रष्टाचार का मामला अब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रखने की तैयारी हो रही है। छात्रनेता और अधिवक्ता आदेश प्रधान ने विवि के कुलसचिव को सुबूतों के साथ मनीष मिश्रा के भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बिंदुओं पर जाँच कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। इन प्रार्थना-पत्रों में लिखित बिंदुओं के आधार पर कुलसचिव ने अभियंता मनीष मिश्रा को जरुरी कागजात और रजिस्टरों के साथ जवाब देने का निर्देश दिया लेकिन अभियंता मनीष मिश्रा ने उन सभी पत्रों को डस्टबिन में डाल दिया और कई महीने गुजर जाने के बाद भी भ्रष्टाचार के आरोपी मनीष मिश्रा ने न तो कोई लिखित जवाब दिया और न ही फोन पर कोई सफाई दी। शायद वह इस अहम् के वहम में है कि जब तक कुलपति कुर्सी पर बैठी है, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। 

अधिवक्ता आदेश प्रधान के शिकायती पत्रों पर कुलसचिव द्वारा अभियंता मनीष मिश्रा से विभिन्न तिथियों में कई पत्र प्रेषित किये:
1. पत्रांक संख्या पीए/2899 दिनांक: 04/06/2025  
2. पत्रांक संख्या पीए/2900 दिनांक: 04/06/2025  
3. पत्रांक संख्या पीए/2904 दिनांक: 06/06/2025  
4. पत्रांक संख्या पीए/2905 दिनांक: 06/06/2025  
5. पत्रांक संख्या पीए/2906 दिनांक: 06/06/2025  
6. पत्रांक संख्या पीए/2907 दिनांक: 06/06/2025  
7. पत्रांक संख्या पीए/2910 दिनांक: 09/06/2025  

लेकिन 5 महीनों के बाद भी विवि के कुलसचिव के किसी भी पत्र का जवाब नहीं देकर अभियंता मनीष मिश्रा कुलसचिव और कुलसचिव कार्यालय के आदेशों की खुली अवहेलना और उपेक्षा कर रहा है जोकि चौधरी चरण सिंह विवि के प्रशासनिक सम्मान और मर्यादा के पूरी तरह से ख़िलाफ़ है। 

अधिवक्ता आदेश प्रधान द्वारा विवि कुलसचिव को दिए गए शिकायती पत्रों में निम्न बिंदुओं पर जाँच कर कड़ी कार्यवाही करने की मांग की गई:

  1. भंडार से संबंधित सभी भंडार गृहो के समस्त रजिस्टर एवं पत्रावलियों का भौतिक सत्यापन हेतु तीन कार्यदिवस में उपलब्ध कराने और 09/06/2025 को समस्त भंडार गृहों का भौतिक सत्यापन कराना सुनिश्चित करें।
  2. विवि के समस्त अप्रयोज्य फर्नीचर, अलमारी, भवन निर्माण सामग्री का पूर्ण विविरण प्रस्तुत करें।
  3. उक्त समस्त स्टोर क्या पूर्णरूप से अप्रयोज्य है अथवा रिपेयर के पश्चात् इन्हे प्रयोग में लाया जा सकता है।  पूर्ण रूप से अप्रयोज्य स्टोर के निस्तारण/नीलामी हेतु क्या प्रयास किये गए। तमाम विवरण प्रस्तुत करें। 09/06/2025 को समस्त भंडार गृहों का भौतिक निरिक्षण करवाना सुनिश्चित करें।
  4. विवि के अतिथिगृह में कार्यरत सभी प्रकार के कर्मचारियों के नाम/पदनाम वार सूची प्रस्तुत करें।
  5. विगत 6 महीनों में (1 दिसम्बर 2024 से 31 मई 2025 तक) अतिथि गृह में अतिथियों द्वारा रूम-रेंट (कमरों का किराया) के रूप में जमा किये गए धन का विवरण, बैंक स्टेटमेंट के साथ प्रस्तुत करें।
  6. विगत 6 महीनों में (1 दिसम्बर 2024 से 31 मई 2025 तक) अतिथि गृह में अतिथियों द्वारा फ़ूड बिल (भोजन का बिल) के रूप में जमा किये गए धन का विवरण, बैंक स्टेटमेंट के साथ प्रस्तुत करें।
  7. विगत 6 महीनों में (1 दिसम्बर 2024 से 31 मई 2025 तक) अतिथि गृह में ठहरे अतिथियों की सूची प्रस्तुत करें।
  8. विगत 6 महीनों में (1 दिसम्बर 2024 से 31 मई 2025 तक) अतिथि गृह में खर्च किये गए धन का पूर्ण विवरण प्रस्तुत करें।
  9. क्या समस्त अतिथियों को रूम रेंट तथा भोजन की रसीद उपलब्ध कराई जा रही है।
  10. अतिथिगृह के संचालन हेतू मेन्टेन किये जा रहे समस्त रजिस्टर एवं फाइल कुलसचिव कार्यालय में निरिक्षण हेतु उपलब्ध कराते हुए उपर्युक्त सूचनाएं तीन कार्य दिवस में आवश्यक रूप से प्रेषित करना सुनिश्चित करें।
  11. विवि परिसर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस प्रेक्षागृह, अटल सभागार, बृहस्पति भवन एवं अतिथिगृह के संबंध में निम्नलिखित अभिलेखों की जानकारी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें: इन सभागार, प्रेक्षगृह और अतिथि गृह को आवंटित करने के क्या नियम, शर्ते और निति है। उक्त भवनों को बाहरी संस्थाओं/संगठनों को आवंटित करने के शुल्क के संबंध में क्या नीति है। क्या शुल्क में छूट देने की कोई नीति है। संगठन/संस्था द्वारा अदा किये गए शुल्क का विवरण जिस अभिलेख में दर्ज किया जाता है उसे प्रस्तुत करें। वसूले गए तमाम शुल्क की रसीदें भी प्रस्तुत करें।
  12. गत 2 वर्षों में आवासों से संबंधित पूर्ण जानकारी एवं पत्रावली प्रस्तुत करें जिसमे शिक्षक/अधिकारी का नाम, उसका पदनाम, सेवानिवृति की तिथि, आवास खाली होने की तिथि, आवास पुनः आवंटित होने की तिथि, आवास का प्रकार एवं संख्या, शिक्षक/अधिकारी/कर्मचारी का नाम जिसे आवंटित किया गया। आदि पूर्ण विवरण के साथ प्रस्तुत करें। 
  13. गत 2 वर्षों में आवासों से संबंधित आवास आवंटन तथा मरम्मत हेतु प्राप्त प्रार्थना-पत्रों के संबंध में अलग-अलग जानकारी निर्धारित प्रारूप पर तत्काल उपलब्ध कराएं: शिक्षक/अधिकारी/कर्मचारी का नाम, उसका पदनाम, इंजीनियरिंग विभाग में आवेदन प्राप्त होने की तिथि, इंजीनियरिंग विभाग के रजिस्टर  संख्या जिसपर आवेदन का अंकन किया गया एवं आवेदन का कृत कार्यवाही का विवरण तत्काल प्रस्तुत करें। 

विवि के कुलसचिव ने सहायक कुलसचिव (सामान्य) को निर्देशित किया कि इन तमाम पत्रों की एक प्रति इनकी व्यक्तिगत पत्रावली में भी संरक्षित की जाये। .

इसके अतिरिक्त आज पूर्व छात्रनेता एवं अधिवक्ता आदेश प्रधान ने विवि के मुख्य द्वार पर मीडिया को बाईट देते हुए कहा कि विवि अभियंता मनीष मिश्रा ने भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं तोड़ दी है। बृहस्पति भवन एवं कई विभागों के भवनों को बिना जरुरत तोडा जा रहा है। उनका मॉडिफिकेशन किया जा रहा है। उनका बिना जरुरत इंटीरियर किया जा रहा है ताकि भारी भरकम रकम कमीशन/रिश्वत के रूप में बटोरी जा सके। यह वीडियो एक बार आपको भी देखना चाहिए। 

 

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