अनियमितता, भ्रष्टाचार और लुटखसोट खुलने के डर से नगर निगम मेरठ ने 30 दिन बाद भी नहीं दिया जनसूचना का जवाब, प्रथम अपील दायर

  • [By: Meerut Desk || 2026-08-17 15:31 IST
अनियमितता, भ्रष्टाचार और लुटखसोट खुलने के डर से नगर निगम मेरठ ने 30 दिन बाद भी नहीं दिया जनसूचना का जवाब, प्रथम अपील दायर

मेरठ। नगर निगम में तमाम अधिकारी बेलगाम हो गए है। न तो कोई भी अधिकारी दफ़्तर में बैठता है और न ही किसी जनसूचना का जवाब देना जरूरी समझते है। 

नगर आयुक्त सौरव गंगवार अगर दस पंद्रह दिन में कभी निगम के दफ्तर कुछ मिनट के लिय आकर बैठ भी जाए उसके बावजूद भी अन्य अधिकारी दफ्तर में नहीं बैठते। मुख्य अभियंता तो शायद खुद को नगर आयुक्त से बड़ा समझते है। नगर आयुक्त के निगम के दफ्तर में बैठने के बावजूद भी अपने केबिन में नहीं बैठते। यानी नगर आयुक्त का इकबाल बिल्कुल खत्म है।

खैर बात हो रही थी, जनसूचना का जवाब नहीं देने की। दरअसल नगर आयुक्त ने निगम में स्थाई लेखाधिकारी की नियुक्ति होने के बावजूद असंवैधानिक/गैरकानूनी तरीके से प्रशासनिक अधिकारी अपर नगरायुक्त को प्रभारी लेखा का अतिरिक्त चार्ज दे दिया। जबकि यह पूरी तरह से ग़लत और असंवैधानिक है। भुगतान की फाइल या चेक पर सिर्फ लेखाधिकारी के ही हस्ताक्षर हो सकते है। जब इस बाबत जनसूचना में नगर आयुक्त के उक्त आदेश से संबंधित कोई शासनादेश, नोटिफिकेशन, ऑफिस आदेश, नगर निगम नियमावली की उस एक्ट/अधिनियम की कॉपी मांगी लेकिन जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत निर्धारित 30 दिन पूरे होने के बावजूद जन सूचना अधिकारी ने कोई भी जनसूचना का जवाब नहीं दिया। 

हालांकि इस बाबत आज प्रथम अपील दायर कर दी गई है। निगम में और निगम क्षेत्र में चर्चा है कि भ्रष्टाचार, अनियमितता और सरकारी खजाने की लूटखसोट का पर्दाफाश होने के डर से जनसूचना का जवाब नहीं देंगे। अगर जनसूचना का सही जवाब दे दिया तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों की गर्दन फंस सकती है।

समाजसेवी और आरटीआई एक्टिविस्ट आदेश त्यागी का कहना है कि निगम के अधिकारी जवाबदेही से बच नहीं सकते। अब हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की जाएगी।

TAGS

# Meerut

SEARCH

RELATED TOPICS