सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: मेरठ में एक-एक अवैध निर्माण ढहाया जाए, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी

  • [By: Meerut Desk || 2026-09-26 22:16 IST
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: मेरठ में एक-एक अवैध निर्माण ढहाया जाए, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी

एशियन एक्सप्रेस लाइव विशेष रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: मेरठ में एक-एक अवैध निर्माण ढहाया जाए, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी

नई दिल्ली/मेरठ: सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में बड़े पैमाने पर फैले अवैध निर्माणों और अतिक्रमण पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि मेरठ में एक-एक अवैध निर्माण को जमींदोज किया जाएगा और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने इसे लेकर उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की रिपोर्ट को बेहद खराब और चिंताजनक करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य बातें और निर्देश:

  • जोन-ए में कार्रवाई का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के जोन-ए में स्थित 17,267 अवैध निर्माणों और इमारतों के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

  • उल्देपुर क्षेत्र पर विशेष नजर: कोर्ट ने शहर के बाहरी हिस्से में बसे उल्देपुर क्षेत्र में सैकड़ों अवैध कॉलोनियों और अवैध निर्माणों का तत्काल सर्वे कर उन्हें पूरी तरह से हटाने का आदेश दिया है।

  • अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने चेतावनी दी कि यदि अवैध निर्माणों या लापरवाही के चलते कोई अप्रिय घटना होती है और किसी की जान जाती है, तो संबंधित सरकारी अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

  • सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश: याचिकाकर्ता लोकेश खुराना द्वारा वकीलों के जरिए याचिका दाखिल कर मुद्दा उठाने और उन्हें धमकियां मिलने की शिकायत पर, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है।

  • पुनर्वास पर विचार: मामले में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार ईडब्ल्यूएस (EWS) और एलआईजी (LIG) श्रेणी के लोगों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें दूसरी जगह पुनर्वासित करने पर विचार कर रही है।

  • अगली सुनवाई: इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई आगामी 9 दिसंबर को होगी।

एशियन एक्सप्रेस लाइव का विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण (विशेष इनपुट):

  • प्रशासनिक तंत्र पर दबाव: सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) और आवास विकास परिषद पर अवैध निर्माण माफियाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ बुलडोजर एक्शन चलाने का भारी दबाव आ गया है।

  • भ्रष्टाचार पर चोट: जानकारों का मानना है कि शहर के चारों जोन्स (ए, बी, सी, डी) में इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण बिना स्थानीय प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं है। ऐसे में कोर्ट द्वारा व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने का आदेश भविष्य में अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • आम जनता और गरीबों के लिए चुनौती: एक तरफ जहां अवैध व्यावसायिक कॉलोनियों और अवैध इमारतों पर शिकंजा कसा जा रहा है, वहीं ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों के सर्वे और कार्रवाई के बीच गरीब तबके के पुनर्वास की उचित व्यवस्था करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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