मेरठ में 7 विधानसभा सीटों पर टिकट के लिए मची होड़, कटेंगे पुराने दिग्गजों के टिकट

  • [By: PK VERMA || 2026-10-03 10:28 IST
मेरठ में 7 विधानसभा सीटों पर टिकट के लिए मची होड़, कटेंगे पुराने दिग्गजों के टिकट

मेरठ में मिशन-2027 का शंखनाद: 7 विधानसभा सीटों पर टिकट के लिए मची होड़, क्या कटेंगे पुराने दिग्गजों के पत्ते?

राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम योगी के दौरे के बाद संगठन सक्रिय, दावेदारों की असली अग्निपरीक्षा विपक्ष से नहीं, बल्कि अपनों के बीच शुरू

विशेष संवाददाता, मेरठ

आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मेरठ में अपनी बिसात अभी से बिछानी शुरू कर दी है। अब टिकट की चाहत रखने वाले नेताओं के लिए महज होर्डिंग या पोस्टर लगाना काफी नहीं होगा। 21 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में हुई अहम बैठक के बाद पार्टी के भीतर रणनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि संगठन का पूरा जोर अब बूथ लेवल, शक्ति केंद्रों और मंडल स्तरीय तैयारियों पर है।

क्या नए चेहरों पर लगेगा दांव?

पार्टी के गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इसी बात की है कि क्या आगामी चुनावों में पुराने विधायकों पर ही दोबारा भरोसा जताया जाएगा या फिर संगठन नए चेहरों के साथ कोई बड़ा प्रयोग करेगा। सूत्रों की मानें तो प्रदेश स्तर पर इस बार युवाओं, महिलाओं और नए ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को तरजीह देने का मन बनाया जा रहा है। अंतिम मुहर भले ही केंद्रीय नेतृत्व लगाएगा, लेकिन इतना तय है कि टिकटार्थियों को अभी विपक्ष से ज्यादा पार्टी के अंदर ही खुद को साबित करने की जंग लड़नी पड़ रही है।

कैंट में सबसे लंबी कतार, महिला दावेदार भी मैदान में

मेरठ की सातों विधानसभा सीटों पर अलग-अलग समीकरण बन रहे हैं। सबसे ज्यादा घमासान मेरठ कैंट सीट पर देखने को मिल रहा है। यहाँ मौजूदा विधायक अमित अग्रवाल के साथ-साथ डॉ. मयंक अग्रवाल, मुकेश सिंघल, नीरज मित्तल, विनीत अग्रवाल शारदा, सुनील वाधवा, अमित गर्ग मूति, वरुण अग्रवाल और राजीव दीवान टिकट की रेस में ताल ठोक रहे हैं। शहर सीट की बात करें तो कमलदत्त शर्मा, एमएलसी धर्मेन्द्र भारद्वाज, सुनील भराला, पीयूष शास्त्री और सरदार दलजीत सिंह की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं, दक्षिण सीट से मंत्री डॉ. सोमेन्द्र तोमर के अलावा मनोज पोसवाल, प्रवीण भाड़ाना, नरेश गुर्जर और पूर्व विधायक रविंद्र भड़ाना भी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। इस बार महिला दावेदारों में बीना वाधवा, शिप्रा रस्तोगी, वर्षा कौशिक और कोमल रस्तोगी के नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आए हैं।

ग्रामीण सीटों पर दिग्गजों की साख दांव पर

जिले की ग्रामीण सीटों पर भी घमासान कम नहीं है:

 * सरधना: यहाँ संगीत सोम के साथ आशीष प्रताप सिंह, उत्कर्ष पुंडीर, शिवकुमार राणा और समीर चौहान अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।

 * किठौर: सत्यवीर त्यागी, अजय त्यागी खरखौदा, देवेंद्र गुर्जर, अश्वथनी त्यागी, डॉ. संदीप त्यागी, डॉ. राहुल त्यागी, सचिन देव त्यागी और प्रदीप त्यागी के नाम चर्चा में हैं।

 * हस्तिनापुर: मंत्री दिनेश खटीक के समानांतर पूर्व विधायक अतुल कुमार, डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी और डॉ. मनोज जाटव भी कतार में हैं।

 * सिवालखास: पूर्व विधायक जितेंद्र सतवाई, मनिंदरपाल सिंह, संजय त्यागी, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी और डॉ. जेवी चिकारा भी टिकट के लिए पसीना बहा रहे हैं।

शहरी बनाम ग्रामीण: बदल गई है रणनीति और वोटर समीकरण

भाजपा का थिंक टैंक हर सीट को एक ही चश्मे से नहीं देख रहा है। सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर और किठौर जैसी ग्रामीण सीटों पर पार्टी का पूरा फोकस सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने पर है। वहीं, मेरठ कैंट, मेरठ शहर और दक्षिण जैसी शहरी सीटों पर नए मतदाताओं को रिझाने और पन्ना प्रमुखों की टीमों को एक्टिव करने पर जोर दिया जा रहा है।

पार्टी के लिए यह रणनीति इसलिए भी अहम हो गई है क्योंकि एसएसआईआर (SSIR) के बाद जिले में मतदाताओं और बूथों का गणित बदल गया है। जिले में मतदाताओं की संख्या जो पहले 26.99 लाख थी, वह घटकर अब 21.93 लाख रह गई है। इसी तरह बूथों की संख्या भी 2981 से कम होकर 2873 पर आ गई है।

मेरठ की 7 विधानसभा सीटें: कहाँ राह आसान और कहाँ कड़ी टक्कर?

मिशन-2027 को फतह करने के लिए भाजपा के लिए मेरठ की सभी सीटें एक जैसी नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और जमीनी समीकरणों के आधार पर सीटों का यह नफा-नुकसान कुछ इस तरह है:

 * कहाँ राह आसान (या सुरक्षित मानी जा रही सीटें):

   * मेरठ कैंट: पारंपरिक रूप से यह सीट भाजपा का सबसे मजबूत और सुरक्षित गढ़ मानी जाती रही है। यहाँ पार्टी के भीतर टिकट के लिए सबसे लंबी कतार और भारी खींचतान जरूर है, लेकिन आम चुनाव के लिहाज से यहाँ भाजपा की स्थिति सबसे मजबूत नजर आती है।

   * मेरठ शहर और मेरठ दक्षिण: शहरी क्षेत्रों में भी भाजपा का मजबूत जनाधार और पन्ना प्रमुखों की सक्रियता पार्टी को बढ़त दिलाती है, हालाँकि यहाँ भीतरघात और नए मतदाताओं को साधने की चुनौती जरूर है।

 * कहाँ मिलेगी कड़ी टक्कर (चुनौतीपूर्ण सीटें):

   * सरधना और किठौर: इन ग्रामीण सीटों पर सपा-आरएलडी और अन्य विपक्षी दलों के मजबूत सामाजिक समीकरणों के चलते भाजपा को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा। सरधना में दिग्गजों की व्यक्तिगत साख और किठौर में जातिगत गोलबंदी के कारण यहाँ मुकाबला बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहने वाला है।

   * हस्तिनापुर और सिवालखास: आरक्षित और ग्रामीण बहुल होने के कारण इन सीटों पर हर बार चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा, यह कह पाना मुश्किल होता है। यहाँ विपक्षी दलों की मजबूत घेराबंदी के चलते भाजपा उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल, मेरठ भाजपा में संदेश बिल्कुल साफ है, टिकट मांगने से ज्यादा अब नेताओं में संगठन के प्रति अपनी वफादारी और सक्रियता दिखाने की होड़ मची हुई है। स्थानीय फीडबैक और बूथ कमेटियों की रिपोर्ट ही 2027 के संभावित उम्मीदवारों का भाग्य तय करेगी। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मेरठ में भाजपा ने 2027 की चुनावी जंग के लिए अभी से कमर कस ली है और टिकट की रेस में कई पुराने दिग्गजों की साख दांव पर है, तो कई नए चेहरों की भी नजरें इस बार टिकट पर टिकी हैं।

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